चतुष्पदी (Quatrain)-29
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ज़िंदगी के लम्हों को गुज़रते
देर नहीं लगती
वर्तमान, अतीत में बदलते देर
नहीं लगती
देर तो लगती है अपना भविष्य
सुधारने में
पल में प्राण पखेरू भी उड़ते
देर नहीं लगती I
Zindgi ke lamhon ko
guzarte der nahi lagti
Vartman, ateet mein
badalte der nahi lagti
Der to lagti hai apna
bavishy sudhaarne mein
Pl mein praan pakheru bhi
udte der nahi lagti
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सर्वाधिकार सुरक्षित/ त्रिभवन
कौल
ReplyDeleteSharda Madra
वाह्ह्ह्ह् जीवन का सत्य दर्शाती अतीव सुंदर सटीक रचना।
June 22 at 8:29pm
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Om Prakash Shukla
सत्य और सार्थक संदेश
अभिनन्दन श्रीमान
22 at 9:47pm
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Mona Singh
वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् वह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आदरणीय सार्थक मुक्तक
June 22 at 10:44pm
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गुप्ता कुमार सुशील
वाह्ह वाह बेहद भावपूर्ण प्रस्तुति आदरणीय |
June 22 at 11:15pm
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Vijay Mishr Daanish
वाह्ह्ह्हह्ह वह्ह्ह्हह शब्द शीर्षक को सार्थक करती बेहतरीन अभिव्यक्ति ,शानदार सृजन को नमन
June 22 at 11:18pm
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Bindu Kulshrestha
वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् सुन्दर सृजन
June 22 at 11:27pm
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Ashwani Kumar
सुन्दर, सत्य, एवं सटीक ।वाह्ह्ह्ह्
June 23 at 12:29am
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Ashok Ashq
बेहतरीन उम्दा
June 23 at 12:56am
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Shipra Shilpi
वाह्ह्ह्ह् वाह्ह्ह्ह्ह्
अद्भुत अनुपम अप्रतिम सृजन
हार्दिक बधाई ।।💐
June 23 at 2:17am
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निशि शर्मा 'जिज्ञासु'
अति सुंदर
June 23 at 7:43am
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Pushp Lata
वाहह्ह्ह्ह् अतिसुंदर अद्भुत सृजन सर जी बधाई
June 23 at 8:44am
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कवयित्री छाया शुक्ला
आदरणीय बधाई हो दार्शनिक भाव लिए शानदार मुक्तक ! :)
June 23 at 12:10pm
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Satish Verma
शाश्वत सत्य को परिलक्षित करती अतीव सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति : स्तुत्य सृजन।
June 23 at 12:29pm
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Sanjay Kumar Giri
देर तो लगती है अपना भविष्य सुधारने में
पल में प्राण पखेरू भी उड़ते देर नहीं लगती ----वाह्ह वाह्ह बहुत सुन्दर
June 23 at 5:52pm
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