Sunday, 23 November 2014

कन्धे तो मिले बहुत रोने के लिए

कन्धे तो मिले बहुत रोने के लिए
कुछ देर रुके और फिर चलते बने
किन्तु नहीं मिला ऐसा कोई हमदम
हम कहते रहें और वे सुनते रहें.
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सर्वाधिकार सुरक्षित/ त्रिभवन कौल

7 comments:

  1. केदार नाथ शब्द मसीहा 9:40pm Nov 23
    बहुत सुंदर

    via fb/wordsmiths

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  2. Shaista Irshad 6:59am Nov 25
    Khoob waah

    via fb/poets corner

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  3. Kaur Rinky 7:01am Nov 25
    bhead khoob

    fb/pc

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  4. Om Prakash Shukla 5:41pm Nov 25
    सुन्दरतम् भाव
    बेहतरीन रचना
    आप का हार्दिक अभिनन्दन है ।

    via fb/uva utkarsh sahitiayk manch

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  5. Ramkishore Upadhyay 6:18pm Nov 25
    अनुपम रचना ।

    via fb/usm

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  6. Ramesh Siddhartha 7:23pm Nov 25
    Sunder v bhavpurn

    via fb/usm

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  7. via fb/Purple Pen on 22 January, 2016
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    Indu Gupta 5:30pm Jan 22
    Wah
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    Dogendra Singh Thakur 5:04pm Jan 22
    Waahhh kya baat sir󾠨󾠨
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    रंजना नौटियाल 3:16pm Jan 22
    सच कहा ।
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    डॉ विवेक सिंह 3:05pm Jan 22
    वाह। अद्भुत
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    Kalika Shukla 2:50pm Jan 22
    कौल साहब ! कहते रहिये हम सुनने के लिये बेताब बैठे हैं !!

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