Monday, 23 July 2018

गीतिका

हादसों पर बिके सब समाचार हैं
मगज़वाले सभी बहुत बेज़ार हैं ?

हर किसी के लहू में सियासत रमी
ज़िंदगी पर मौत अब घुड़सवार है

साज़िशें बादलों की फ़ना हो गयी
बिजली को चमकने से इंकार है ?

हो गये सब नज़ारे भयानक यहाँ
ज़लज़लों की उपेक्षा सुआचार है ?

गुज़र त्रिभवन इसी भयानक दौर से
धरम की ओट में  धर्म पर वार है ।।
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सर्वाधिकार सुरक्षित /त्रिभवन कौल

4 comments:

  1. All comments via fb/युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (न्यास)
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    अजय भोजपुरी
    अजय भोजपुरी 7:41pm Jul 23
    वाह वाह
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    डा. पूनम 7:41pm Jul 23
    बहुत खूब
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    Ramkishore Upadhyay 7:41pm Jul 23
    अद्भुत कृति
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    Ashwani Kumar 8:00pm Jul 23
    बहुत ख़ूब सुंदर सत्य तथा सटीक। हर शेर शानदार।
    💐👌👏👏👏
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  2. All comments via fb/युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (न्यास)
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    Rahat Barelvi 8:10pm Jul 23
    वाहहह..वाहहहहह ! क्या बात..बेहद उम्दा रचना का सृजन हुआ है आपकी लेखनी से आदरणीय ! सभी अशआर शानदार बने है..दिली मुबारकवाद 👌👌👌👌👌👌💐💐💐💐
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    Raj Kishor Pandey 8:10pm Jul 23
    उम्दा गजल वाह
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    Subhash Singh 8:11pm Jul 23
    लाजवाब
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    Kviytri Pramila Pandey 8:36pm Jul 23
    लाजवाब
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    गुप्ता कुमार सुशील 10:46pm Jul 24
    बेमिसाल सृजन..जय हो आदरणीय
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    Meenakshi Bhatnagar 10:47pm Jul 24
    शानदार रचना

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  3. Kavita Sud 10:48pm Jul 24
    अनुपम सृजन
    ------------via fb/YUSM

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  4. via fb/मुक्तक-लोक
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    मुरारि पचलंगिया 4:32pm Jul 26
    वाहहह... बहुत सुंदर रचना
    आदरणीय
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    Subhash Singh 4:32pm Jul 26
    लाजवाब गीतिका
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    Santosh Shukla 4:32pm Jul 26
    वर्तमान स्थिति पर करारे व्यंग्यात्मक सृजन का गीतिका-गुंजन समारोह में स्वागत है
    ज़िन्दगी पर मौत अब घुड़सवार है
    बधाई हो आपको सुन्दर सृजन के लिए
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    गुप्ता कुमार सुशील 4:32pm Jul 26
    वाहहह..सार्थक भावपरक सृजन आदरणीय.🙏 बधाई
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