Wednesday, 25 January 2017

लाली का सपना (एक लघु कथा)


लाली का सपना (एक लघु कथा)

-----------------------------------------------

सोलह साल की उम्र में सपनो को भी पर लग जाते हैं I  वह सपने जिनका जीवन की आपा धापी से कुछ लेना देना नहीं I एक बार देखने लग जाओ तो अफीम जैसा चस्का लगा देतें हैं यह सपने I बस देखते ही रहो, सोते जागते देखते ही रहो I लाली भी नवयौवन के उन सपनो में अपना संसार बसा सकती थी। वह सपने जो उसके जीवन में कभी भी पूरे नहीं हो सकते थे I पर वह देखती थी क्यूंकि उसके पास जीवित रहने के लिए सपनों के सिवाय कुछ भी तो नहीं था I सपने ही उसको ज़िंदा रखे हुई थे I सपने अगर उसके साथी नहीं होते तो शायद वह कब का इस दुनिया को छोड़ कर चली जाती, अपनी माँ की तरह I पर सपनो में वह ताकत है जो पूरे होने लगे तो मरते हुए इंसान में भी एक बार जान फूंक दे I अपने सपनो को पूरा करने का सपना।   ज़िंदगी को  भरपूर जीने का सपना I अपने प्यार के साथ रहने का सपना।  कुछ बनने का सपना।  कुछ कर गुजरने का सपना।  सपने तब सपने नहीं रह जाते।  एक उद्देश्य पूर्ती का साधन  बन, तीव्र इच्छा का रूप धारण कर लेते हैं। सपनो में अगर किसी मनुष्य  में निष्क्रयता की भावना लाने का सामर्थ्य है तो किसी में  उन सपनो को साकार करने का मन्त्र एक हताश हुए इंसान में जान फूंकने का कार्य भी करते हैं।  सपनो की इस ताकत को बड़े से बड़े वैज्ञानिकों ने, दर्शन शास्त्रियों ने स्वीकारा है। लाली के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। लाली ने केवल एक ही सपना देखा था I माँ की इच्छा पूर्ण करने का I जब सपने इच्छा का रूप धारण कर लेतें हैं तो दृढ  इरादे वाले, दृढ इच्छा शक्ति वाले उन सपनो को पूरा करने में एड़ी चोटी का ज़ोर लगा देते  हैं I लाली की मां का सपना उसको पढ़ा लिखा कर उसे ज़िंदगी की उन ऊंचाइयों को प्राप्त कराना था जहां लाली किसी भी सुख सुविधा से वंचित ना रह सके I  उसका लक्ष्य एक ही था लाली को स्कूल भेजना। यही उसका सपना भी था

मां के  उसी सपने को लाली पूरा करने में लगी थी।  लाली  एक कुशल , बुद्धिमान, और स्वाभिमानी लड़की थी।  शीघ्र ही उसने स्कूल में वह मुकाम हासिल कर लिया जो किसी भी स्कूल के लिए गर्व की बात हो सकती थी I उसने 12 क्लास में उच्च्तम श्रेणी में सफलता हासिल कर ना केवल स्कूल का नाम रोशन किया अपितु आगे की शिक्षा दीक्षा के लिए सरकार से वजीफा भी प्राप्त किया। 

दस बरस बीत गए. आज लाली भारत सरकार के एक प्रतिष्ठित संस्थान  में एक ऊंचे पद पर भारत का नाम रोशन कर रही है I

जो केवल सपने ही देखतें रह जाते हैं, सपने कभी भी उनका साथ नहीं छोड़ते और उनके सपने सपने ही रह जातें हैं। पर जो सपनों को साकार करने में जुट जातें हैं उनके सपने तो पूरे होते ही हैं अन्य  सपनो को साकार करने की वजह भी मिल जाती है I

=====================================

सर्वाधिकार सुरक्षित/त्रिभवन कौल

4 comments:

  1. डॉ किरण मिश्रा
    आशा से ओत-पोत कहानी।
    January 26 at 7:14pm
    ---------------------via fb/TL

    ReplyDelete
  2. Neelofar Neelu
    बहुत सुंदर और प्रेरक रचना आदरणीय कौल साहब😊💐👌
    January 26 at 10:42am
    ----------------------------
    Vishal Narayan
    वाहहहहहहहह
    प्रेरक सृजन आदरणीय
    January 26 at 10:48am
    -----------------------------
    मुरारि पचलंगिया
    प्रेरणा दायक कथा
    January 26 at 10:59am
    ------------------------------
    Indira Sharma
    keval sapne dekhne vaalon ke lie prerna . sarthak srijan
    January 26 at 12:56pm
    ------------------------------
    Shailesh Gupta
    बहुत सुंदर..... संवेदनशील सृजन.... !
    January 26 at 1:40pm
    -------------------------------
    Rajnee Ramdev
    प्रेरक प्रसंग
    January 26 at 6:59pm
    -----------------------------
    विवेक शर्मा आस्तिक
    वाहहहहहहह बहुत सुन्दर लघुकथा आदरणीय
    January 27 at 5:40pm
    ---------------------------via fb/Purple Pen

    ReplyDelete
  3. वसुधा कनुप्रिया
    10:59am Jan 26
    वाहहहहहह अत्यंत सुंदर और प्रेरक लघु कथा, आदरणीय । धैर्य, एकाग्रता और परिश्रम से सपनों को यथार्थ का रूप दिया जा सकता है ।
    -----------------------------------------via fb/Purple Pen

    ReplyDelete
  4. via fb/ युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच.
    -----------------------------
    ओम प्रकाश शुक्ल 7:51am Jan 29
    बहुत सार्थक संदेश देती रचना
    अभिनन्दन आदरणीय
    ---------------------------------
    Vishal Narayan 7:51am Jan 29
    बहुत खूब आदरणीय
    ---------------------------------
    राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी 7:51am Jan 29
    लाजवाब सृजन आदरणीय नमन
    --------------------------------
    Om Prakash 7:51am Jan 29
    हार्दिक बधाई
    --------------------------------
    गुप्ता कुमार सुशील 7:51am Jan 29
    जो केवल सपने ही देखतें रह जाते हैं, सपने कभी भी उनका साथ नहीं छोड़ते और उनके सपने सपने ही रह जातें हैं। पर जो सपनों को साकार करने में जुट जातें हैं उनके सपने तो पूरे होते ही हैं................पूर्णतया सत्य आदरणीय आपके सुन्दर सार्थक व प्रेरक विचार का सहृदय स्वागत है .........सादर नमन :)

    ReplyDelete