Tuesday, 27 October 2015

चतुष्पदी (Quatrain)-14


चतुष्पदी (Quatrain)-14
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तमसा नदी का तट था मरा मरा का जाप
पाप कर्म से मुक्ति मिले करी तपस्या आप
आदि कवि हुए प्रतिष्ठित दे रामायण ज्ञान
जनजन बसाये राम राम, हरे हर संताप
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Tamsa nadi ka tat tha mara mara ka jaap

Paap karm se mukti mile kari tapsya aap

Aadi kavi  hue pratishtith de ramayan gyan

Janjan besaye ram ram,  hare har santaap.
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सर्वाधिकार सुरक्षित/त्रिभवन कौल
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7 comments:

  1. वसुधा 'कनुप्रिया' 9:49am Oct 29
    मरा मरा से राम राम तक का अद्भुत अनुभव चार पंक्तियों में समेट लिया आपने । बहुत सुन्दर !

    via fb/Purple Pen

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  2. Sangita Goel 10:25pm Oct 27
    अति सुंदर सर
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    Animesh Sharma 9:56pm Oct 27
    वाह्ह्ह्ह्ह्
    उत्तम
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    Indira Sharma 9:30pm Oct 27
    Uttam
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    वसुधा 'कनुप्रिया' 9:27pm Oct 27
    वाह, बहुत सुंदर प्रस्तुति।
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    Chanchala Inchulkar Soni 7:40pm Oct 27
    अद्भुत सृजन ...
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    Rekha Joshi 7:35pm Oct 27
    बहुत सुन्दर
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    via fb/YUSM

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  3. Om Prakash Shukla 5:52pm Oct 27
    वाह आदरणीय
    अति उत्तम
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    गुप्ता कुमार सुशील 5:43pm Oct 27
    वाह्ह,,,,,, अनुपम सृजन आदरणीय |
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    via fb/YUSM

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  4. Rashmi Jain 5:50pm Oct 27
    मरामरामरामरा में ही राम मिल गए ।
    लाजवाब रचना सर।
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    via fb/Kasturi Kanchan

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  5. रंजना नौटियाल 9:45pm Oct 29
    बहुत सुन्दर लिखा है आपने सर।

    via fb/Purple Pen

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  6. Rita Thakur 4:56pm Oct 30
    बहुत सुन्दर रचना
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    ब्रह्माणी 'वीणा' हिन्दी साहित्यकार 4:48pm Oct 30
    वाहहहहहह,,,लाजवाब
    बहुत सुंदर सृजन,,,,आदरणीय
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    via fb/ABAK

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  7. Anupama Sarkar 5:19pm Nov 1
    Bhavpoorn
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    Rose Angel Rajshree Kaul 6:25am Nov 2
    Here also seen by 62 ....but only 9 likes ...

    May I ask the sensitive sensible ones ....
    Do use a thumb to appreciate .
    Why only using it downwards to collect that trash of ego and jealousy inside you ....--------------------------------------------------------

    Rose Angel Rajshree Kaul 6:27am Nov 2
    इतना सुन्दर लिखा है हमारी धरोहर के बारे में ।।
    क्या ये भी पसंद नहीं जो किसी व्यक्ति विशेष की नहीं तारीफ है???
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    via fb/Purple Pen

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